ना केवल शहर को सही मायनो में कविता के मंच पर अखिल भारतीय स्तर तक ले जाने का श्रेय डॉ. रमेश गुप्ता ‘चातक’ को जाता है, बल्कि  उसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए एक नयी पीढ़ी के मार्गदर्शन का पूरा श्रेय भी आपको ही जाता है | इलेक्ट्रोनिक माध्यमों की प्रचुरता के अभाव के दिनों  में भी आपकी लोकप्रियता शिकार पर रही