अब बताईये भला? क्या बिना पोहे, सेव और जलेबी के बिना कभी रविवार मना है उज्जैन वालों का ? उनके  लिए तो मानों ये अमृत समरूप है ! इसके बिना सृष्टि की कल्पना ही अधूरी है 🙂 यूं भी मालवा वाले इसी ब्रह्म-वाक्य में भरोसा रखते है की ‘अंतिम समय में सिर्फ खाया पिया ही साथ जायेगा, धन संपत्ति नहीं’  |

तो अगर पोहे हो, साथ में सेव, बारीक कटा हुआ प्याज, नीबू, जीरवन और गरम गरम जलेबी.. बस मान लीजिए एक अच्छे दिन की शुरवात हो गई | आगे कुछ पोस्ट में आपको बताएँगे कुछ बेहतरीन ‘ठीये’ जहा आप पोहे और जलेबी का भरपूर आनंद ले सकते है !