Batic-printing

भैरवगढ़ छपाई की शुरुआत आलू से बने ब्लॉकों से हुई थी। बाद में यहां के कपड़ों पर मिट्टी और लकड़ी के ब्लॉक भी छापे गए, लेकिन रंग सब्जियों से ही बनते थे। अब कमोबेश सभी अलीजरीन का इस्तेमाल करते हैं, जो हमेशा से लाल रंग की छपाई के लिए यहां इस्तेमाल होता है। इसे आक के पौधे की जड़ों से निकाला जाता है।

तकनीकी करण के इस दौर में ये शिल्प  लगभग मरणासन्न अवस्था में पहुच गया है | भैरव गढ़ के करीब १५० छीपा परिवार अपने पैत्रक व्यवसाय से लगभग दूर होने लगे है