लो जी ! मेले ठेले का माहौल हो और अपने उज्जैनी न पहुचे तो लानत है आज भी यही हुआ,    हमारे नायब शहर की नायाब  जनता सपरिवार सुबह ६ बजे से निकल कोठी रोड पर |    तरणताल से कोठी तक भीड़ ही भीड़ ! ऐसा लग रहा था मानों कार्तिक का मेला अपनी ‘जिग्गो’ और ‘टेम’ छोड़ कर नदी से कोठी और शाम से सुबह, शहर के दूसरे कोने पर सिमट आया हो | आगे की कहानी चित्रों में देखिये !