भारतीय संस्कृति का त्यौहार दीवाली दुनिया भर में धूमधाम से मनाया जाता है। हमारे देश में दीपावली के साथ अनेक सांस्कृतिक और आस्थागत संदर्भ जुड़े हैं। भारत के अलावा दुनिया के कुछ अन्य देशों में भी फायर फेस्टिवल या रोशनी का त्यौहार, दीवाली जैसी ही धूमधाम से मनाया जाता है। सांस्कृतिक और भौगोलिक विभिन्नता के चलते इसे मनाने का लोगों का अंदाज भी थोडा अलग है। समानता यह है कि रोशनी के इस त्यौहार को सभी देशों में खुशी, समृद्धि और सत्य की जीत के पर्व के रूप में मनाते हैं। भारत के पड़ोसी देश म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल आदि में काफी हद तक भारतीय परंपरा के अनुसार ही दीवाली मनाई जाती है। जबकि जापान, सिंगापुर, थाइलैंड और में इसे विशेष अंदाज में मनाया जाता है। त्रिनिदाद, गुयाना, केन्या, नेपाल समेत अन्य देशों में दीवाली पर राष्ट्रीय अवकाश रहता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ देशों के बारे में जहां दीवाली या फायर फेस्टिवल्स मनाएं जाते हैं:

नेपाल :

नेपाल में दीपावली का पर्व पांच दिन मनाया जाता है। परंपरा वैसी ही है जैसी भारत की है। थोड़ी भिन्नता भी है। पहले दिन कौवे को, दूसरे दिन कुत्ते को भोजन कराया जाता है। लक्ष्मी पूजा तीसरे दिन होती है। इस दिन से नेपाल संवत शुरू होता है इसलिए व्यापारी इसे शुभ दिन मानते हैं। चौथा दिन नए साल के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन महापूजा होती है और बेहतर स्वास्थ्य की कामना की जाती है। पांचवा दिन भाई टीका होता है, जब बहनें भाइयों का तिलक करती हैं।अगर बात अफ्रीकी देश मारीशस की करें तो वहां भारतवंशीदीपावली पर लक्ष्मी पूजन पूरी विधि के अनुसार ही करते हैं। भारत के विपरीत वहां पर मिठाइयां घरों में ही पकाने की ही रिवायत है। सबसे गौरतलब बात यह है कि दिवाली के दिन भारतवंशीपरम्परगत भारतीय वेषभूषा मे ही होती हैं।

श्रीलंका :

श्रीलंका में तमिल समुदाय के लोग इस दिन तेल स्नान के बाद नए कपड़े पहनते हैं और ‘पोसई’ (पूजा) कर बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। शाम को पटाखे छोड़े जाते हैं.

सिंगापुर :

दीपावली के दिन सिंगापुर में सरकारी छुट्टी होती है। वहां की दीपावली को ‘नन्हें भारत’ की दीपावली भी कहा जाता है। यहां ‘हिन्दू एन्डाउमेंट बोर्ड ऑफ सिंगापुर’ कई सांस्कृतिक आयोजन करता है। सिंगापुर के 18 से अधिक मंदिरों में दीवाली के अवसर पर परंपरागत प्रार्थना ‘याधुम औरे यावारुम केलिर’ (हर देश मेरा है और सभी लोग मेरे बांधव हैं।) का आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में एकता और शांति स्थापित करना है। ध्वनि प्रदूषण पर रोक के चलते पटाखे जलाने की इजाजत नहीं होती लेकिन फुलझड़ियां खूब जलाई जाती है |

त्रिनिदाद :

यहां पर दीवाली के दिन नेशनल काउंसिल ऑफ इंडियन कल्चर में रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। सरकारी कर्मचारी और मंत्री भारतीय परिधान में कार्यक्रम में शामिल होते हैं। शाम होते ही दीप की रोशनी से शहर जगमगाने लगते हैं। इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए लोग रात में सड़कों पर निकलते हैं। साथ ही एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार करते हैं।

 थाइलैंड :

थाइलैंड में दीवाली को लाम क्रियोंघ के नाम से मनाया जाता है। केले की पत्तियों से बने दीपक और धूप को रात में जलाया जाता है। उसके साथ पैसा भी रखा जाता है। जलते हुए इस दीप को नदी के पानी में बहा देते हैं।  जलते हुए इस दीप को नदी के पानी में बहा देते हैं, जो पानी में अपनी सुंदरता की छटा बिखेरता है। इसके अलावा लोग एक दूसरे को त्यौहार की शुभकामनाएं भी देते हैं।

जापान :

सूर्योदय के देश में दीवाली को खुशी, उन्नति और समृद्धि के त्यौहार के रूप में मनाते हैं। हर साल जनवरी माह में शुरू होने वाला ओनियो फेयर फेस्टिवल यहां का सबसे प्राचीन त्यौहार है। इसे मनाने का अंदाज भी रोचक है। इस त्यौहार पर लोग बागों और बगीचों में जाते हैं। लोग कागज से बने लालटेन को पेड़ की शाखाओं में लटका देते हैं। फिर नए वस्त्रों को पहनकर सारी रात परंपरागत गीतों पर नृत्य करते हैं। साथ ही बोटिंग का भी आयोजन किया जाता | यहां फुकुओका में दीवाली जैसा प्रकाशमयी त्यौहार धूमधाम से मनता है। इस दौरान छह मशाल जलाई जाती हैं जो कि आपदा को खत्म करने के प्रतीक के रूप में होती है। इसमें आग की बत्ती को मंदिर से निकाल कर दूसरे जगह तक ले जाया जाता है। जापानी खास तरह के सफेद कपड़े पहनकर टॉर्च को घुमाते हैं। आग से हैरतअंगेज करतब दिखाना इस फेस्टिवल एक अद्भुत अनुभव है।

इंग्लैंड:

एक पर्व 1605 से मनाया जा रहा है जो कि ब्रिटेन में अलग ही मायना रखता है। आधी रात आते ही ऑटरी सेंट मैरी शहर रोशनी से प्रज्जवलित हो उठता है। इस फायर फेस्टिवल को हर साल 5 नवंबर को मनाया जाता है। डेवन के दौरान लोग सत्तरह फ्लैमिंग बैरल लेकर रोड पर मार्च करते हैं। झर्राटेदार बैरल और पटाखे हर उम्र के लोगों के हाथ में देखे जाते हैं, जो अंत में शहर के बीचों-बीच एकत्रित होकर बोनफायर भी जलाते हैं।

स्कॉटलैंड :

हर साल जनवरी के आखिरी मंगलवार को लेर्विक में एक प्रकाशोत्सव आयोजित किया जाता है जिसे वे-अप-हेली आ कहते हैं। यह वास्तव में दीवाली का ही रूप है। इस त्यौहार में लोग प्राचीन समुद्री योद्धाओं जैसी ड्रेस पहने हाथ में मशाल लिए जुलूस निकालते हैं। पूरा शहर रोशनी से घिरा रहता है।

कनाडा:

कनाडा के ‘न्यूफाउंड लैंड’ में 5 नवंबर को दीवाली की तरह एक रात आती है। यहां आतिशबाजी की खुशी के पीछे बताया जाता है कि अंग्रेज एवं आयरिश लोग अच्छी जिंदगी की तलाश में इधर आए थे और वही आज कनाडा कहलाता है। बोनफायर में मस्ती का आलम यह है कि मकान, खिड़कियां भी रंग देते हैं।

अमेरिका :

फ्लोरिडा के अल्टूना शहर में हर साल 31 अक्टूबर से 1 नवंबर मनने वाला ‘सैमहेन’ फेस्टिवल बहुत शानदार होता है। भूतों के सम्मान में आयोजित इस त्यौहार के दौरान बोन फायर जलाई जाती है। मनोरंजन और अलग-अलग थीम्स पर आयोजित होने के कारण बाहरी लोग भी यहां पहुंचकर हैरतअंगेज कारनामों का जमकर लुत्फ उठाते हैं।