स्वाभिमान के सूर्य10264432_737571332960710_161204518728752492_n

भगवान श्रीकृष्ण व बलराम कं विद्या गुरु महर्षि सान्दीघनि वंषोत्पन्न पं. सूर्यनारायण व्यास (1902-1976) संस्कृत, ज्योतिष, इतिहास, साहित्य, पुरातत्व एबं व्यंग्य के अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के  विलक्षण विद्वान थे । स्वतंत्रता संग्राम  में कूद पड़े , खून खौला देने वाले लेख लिखे और सशस्त्र क्रान्ति में हिस्सेदारी की, गुप्त रेडियो स्टेशन चलाए, पैम्पलेट, पर्चे, पोस्टर छपवाये । सरदार भगत सिंह को छुड़वाने के लिये सेठ गढोदिंया डकैती कांड कं प्रमुख अभियुक्तों को अपने धर छिपाया । ‘राष्ट्रयज्ञ’ कंलेण्डर प्रकाशित किया । असंख्य क्रान्तिकारियो को हथियार एवं आर्थिक सहायता दी । 1934 में अजमेर सत्याग्रह में मालवा के जत्थे  नायक बने । ‘इंडियन डिफेंस एक्ट’ के तहत जेल यातना और नज़रबन्दी भी सही । शरतचंद्र बोस एवं के. एम. मुंशी की पैरवी पर रिहा हुए ।

भविष्यदृष्टा व्यास जी जानते थे स्वतंत्रता उपरांत भी मानसिक एवं सांस्कृतिक दासता से शायद हम मुक्त न हों अत: उन्होंने बर्ष 1928 से ही उज्जयिनी में अखिल भारतीय कालिदास समारोह मनाना आरंभ कर दिया था । भारतीय रंगमंच की सांस्कृतिक आधारशिला इस समारोह मेँ भारत और संसार के प्राय: सभी महान् कलाकार बुद्धिजीवी अब तक हिस्सा ले चुके है  । स्वतंत्रता उपरांत भी प्राय: सभी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री इस समारोह मेँ उज्जैन आए हैं ।

सोवि़यत रूस में उन्होंने ‘महाकवि कालिदास’ पर डाक टिकट निकलवाया । भारत में भी बाद में वर्ष 1958 मेँ कालिदास पर डाक टिकट उन्हीं के प्रयासो से जारी हुआ ।

कवि कालिदास नामक फीचर फिल्म उन्हों की प्रेरणा और परामर्श  से  बनी । उनके जीवन को सारी संचित निधि के दान द्वारा आज़ उज्जयिनी में स्थापित  कालिदास अकादमी उनके सपनों का साकार ज्योतिर्बिम्ब है । आज भी प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला अखिल भारतीय कालिदास समारोह उनका जीवन्त स्मारक है ।

प्रखर पत्रकार, कान्तिकारी पं. व्यास ने वर्ष 1942 में उज्जयिनी से ’विक्रम’ मासिक पत्र आरभ किया और उसके माध्यम से  सारे राष्ट्र के सोए पराक्रम को जगाने के लिये विक्रम-संवत  के दो हजार वर्ष पूर्ण होने पर देश में विक्रम सहस्त्राब्दि समारोह मनाया । उज्जयिनी में उनकें द्वारा स्थापित विक्रम विश्वविद्यालय, विक्रम कीर्ति मंदिर उनकें इस महान अवदार की कीर्ति गाथा है । हिन्दी, मराठी और अंग्रेजी में विलक्षण और असाधारण ग्रंथ विक्रम स्मृति ग्रंथ भी प्रकाशित किया गया । प्रकाश पिक्चर्स ने उन्हीं की प्रेरणा  और मार्गदर्शन में पृथ्वीराज कपूर को लेकर सम्राट विक्रमादित्य फिल्म का निर्माण किया ।

इससे पूर्व वे वर्ष 1930 में ही इतिहास-पुरातत्व  का अत्यंत महत्वपूर्ण शोध संस्थान सिन्धिया प्राच्यविद्या शोध प्रतिष्ठान उज्जयिनी में स्थापित कर चुके थे  ।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति द्वारा उन्हें पङ्मभूषण (1958) के पद्मभूषण अलंकृत किया गया उन्होंने अंग्रेजी को अनंत काल तक जारी रखने  वाले विधेयक के विरोध में (1967) लौटा भी दिया । हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा साहित्य-वाचस्पति, विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा डी-लिट, मध्य प्रदेश शासन द्वारा राजकीय फरमान जैसे सम्मानों से अलंकृत पं. व्यास स्वतंत्रता पूर्व 114 स्टेट के राज ज्योतिष भी रहे । ज्योतिष  जगत के वे सर्वोच्च न्यायालय एवं सूर्य कहलाते हैं । उनकी असंख्य भविष्यवाणियां सत्य सिद्ध हुई जिनमें विश्वयुद्ध, भूकम्प, साधित की स्वतंत्रता, बापूकी हत्या, प्रथम राष्ट्रपति एवं प्रथम प्रधानमंत्री कौन होगा – चर्चित रही  ।

पं. व्यास गुजराती, मराठी, बंगला, संस्कृत के भी मर्मज्ञ थे । पचास से अधिक जानों के लेखक और असंख्य ग्रंथो के संपादक रहे । वे एक श्रेष्ट व्यंग्यकार, कवि, निबन्धकार, इतिहासकार थे । अकेले विक्रम मासिक में ‘व्यास  उवाच’ एवं ‘बिन्दु-बिन्दु’ विचार  शीर्षक से लिखे उनके संपादकीय की संख्या 2500 से ऊपर है ।

1937 में वे सारा योरोप घूमे और यात्रा साहित्य पर उनकी कृति ‘सागर प्रवास’ मील का पत्थर मानी जाती है । आधुनिक उज्जयिनी में एक व्यास युग का निर्माण करने वाले पं. व्यास विक्रम विश्वविद्यालय, विक्रम कीर्ति मंदिर, सिन्धिया प्राच्यविद्या शोध प्रतिष्ठान, कालिदास अकादमी एवं अखिल भारतीय कालिदास समारोह के जनक ही नहीं महान मनुष्य, समाज सुधारक, मालवा के नूतन राजा राममोहन प्राय और विनोद प्रिय बर्नाड शा कहलाते थे, तो स्बाधीनता सग्राम में सशस्त्र कान्ति से लेकर अहिंसक सत्याग्रह में हिस्सा लेने वाले प्रखर पत्रकार, संपादक भी थे ।

कुछ अति दुर्लभ छाया चित्र (सौजन्य – पं. राजशेखर व्यास