Posts in category नौ रत्न


ताज़ा चिठ्ठेनौ रत्नमुखपृष्ठविशेषसाहित्य

वराहमिहिर : डाॅ. मुरलीधर चाँदनीवाला

वराहमिहिर तुम पहले व्यक्ति हो वराहमिहिर! जो अवन्तिका से निकले तो फैल गये अखंड भारत में, उज्जयिनी में नहीं होकर भी तुम उज्जयिनी में रहते …

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भर्तृहरि : डाॅ.मुरलीधर चाँदनीवाला

भर्तृहरि —— भर्तृहरि लौट-लौट आते हैं अवन्ती में, खड़े होते हैं कल्पलता के नीचे कभी मौन,कभी मुखर। वैराग्य के जंगल में महाकाल-वन नहीं होता, शिप्रा …

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इतिहासनौ रत्नमुखपृष्ठ

देवताओं के ऋषि : सांदीपनि

सांदीपनि परम तेजस्वी तथा सिद्ध ऋषि थे, सांदीपनि, का अर्थ ‘देवताओं के ऋषि’  होता है | उज्जैन ऋषि सांदीपनि की तप स्थली रही | यहां महर्षि ने …

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