Posts tagged उज्जैन पर कविता


ताज़ा चिठ्ठेनौ रत्नमुखपृष्ठविशेषसाहित्य

भर्तृहरि : डाॅ.मुरलीधर चाँदनीवाला

भर्तृहरि —— भर्तृहरि लौट-लौट आते हैं अवन्ती में, खड़े होते हैं कल्पलता के नीचे कभी मौन,कभी मुखर। वैराग्य के जंगल में महाकाल-वन नहीं होता, शिप्रा …

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ताज़ा चिठ्ठेमुखपृष्ठसाहित्य

हे उज्जयिनी! तू बुला ले अपने पास।

  डाॅ.मुरलीधर चाँदनीवाला   बरसों से भटक रहा हूँ इधर-उधर जीवन बहती नदी की तरह निकल गया बहुत आगे, अब बैठता हूँ अकेले में तब याद …

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ताज़ा चिठ्ठेमुखपृष्ठशहर की हस्तियाँसंस्कृत कवितायेँ

उज्जयिनी जयते : आचार्य श्रीनिवास रथ

— महाकालपूजास्वरललिता कालिदासकविताकोमलता भुवनमलंकुरुते। उज्जयिनी जयते।। — सान्दीपनिसन्दीपितसंस्कृति-शिक्षापरम्परा प्रतिपलमञ्जुलदीपशिखोज्ज्वलमंगलनाथधरा। देवलोकरुचिरा गगनतले ललिते उज्जयिनी जयते।। — उदयनवीणावादनपुलकितवदना संकुचिता वासवदत्ता चकिताऽऽकुलिता सुप्तेवालिखिता। प्रणयरसाकुलिता मनसा मन्त्रयते। उज्जयिनी जयते।। …

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इतिहासमुखपृष्ठविशेषशहर

उज्जयिनी : लगभग पन्द्रह सौ साल पहले

अस्ति सकलत्रिभुवनललामभूता,प्रसवभूमिरिव कृतयुगस्यात्मनिवासोचिता भगवता महाकालाभिधानेन भुवनत्रयसर्गस्थितिसंहारकारिणाप्रमथनाथेनेववापरेव••••विजितामरलोकद्युतिरवन्तीषूज्जयिनी नाम नगरी। उपन्यासकार बाणभट्ट ,620 ईस्वी की कृति कादम्बरी में उल्लेखित उज्जयिनीवर्णन पर आधृत   — तीनों लोकों में …

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