ताज़ा चिठ्ठे

ताज़ा चिठ्ठेमंथनमुखपृष्ठविशेषशहर

पचास साल पहले : उज्जैन | डाॅ.मुरलीधर चाँदनीवाला

1-1955-56 में हमारा परिवार सतीगेट से सटे हुए मकान में रहता था।नीचे जनसेवा केमिस्ट की दुकान थी। दूसरे आमचुनाव के दौर में वहाँ श्री बाबूलाल …

Read more 0 Comments
इतिहासताज़ा चिठ्ठेमुखपृष्ठशहर

संस्कृतिमवन्ती अवन्तिका : डॉ. पवन व्यास

हमारी उज्जयिनी प्राचीन काल से ही शिक्षा का महत्त्वपूर्ण केन्द्र रही है । मुझे ऐसा लगता है कि ’गुरुभूमि’ के रूप में संसार में इसकी …

Read more 0 Comments
ताज़ा चिठ्ठेनौ रत्नमुखपृष्ठविशेषसाहित्य

वराहमिहिर : डाॅ. मुरलीधर चाँदनीवाला

वराहमिहिर तुम पहले व्यक्ति हो वराहमिहिर! जो अवन्तिका से निकले तो फैल गये अखंड भारत में, उज्जयिनी में नहीं होकर भी तुम उज्जयिनी में रहते …

Read more 0 Comments
ताज़ा चिठ्ठेमंथनमुखपृष्ठविशेषसाहित्य

कहाँ जाऊँ, दिल्ली या उज्जैन ? – निरंजन श्रोत्रिय

कहाँ जाऊँ, दिल्ली या उज्जैन ? मेरा सिर गरम है इसीलिये भरम है सपनों में चलता है आलोचन विचारों के चित्रों की अवलि में चिन्तन। …

Read more 0 Comments
ताज़ा चिठ्ठेनौ रत्नमुखपृष्ठविशेषसाहित्य

भर्तृहरि : डाॅ.मुरलीधर चाँदनीवाला

भर्तृहरि —— भर्तृहरि लौट-लौट आते हैं अवन्ती में, खड़े होते हैं कल्पलता के नीचे कभी मौन,कभी मुखर। वैराग्य के जंगल में महाकाल-वन नहीं होता, शिप्रा …

Read more 0 Comments
जैव विविधताताज़ा चिठ्ठेमुखपृष्ठविशेष

उज्जैन : जैव विविधता : नौलखी इको टूरिज्म पार्क

उज्जैन की जैव विविधता को दर्शाता  वन विभाग, उज्जैन का एक अद्भुत प्रयास वन विभाग , उज्जैन द्वारा १० वर्षों के अथक प्रयासों से विकसित …

Read more 0 Comments

स्वागत है आपका, ये है आपके शहर की वेबसाइट उज्जैन.कॉम

समुद्र तल से ऊंचाई – 1678 फीट || देशांश – 23डिग्री.50′ उत्तर || अक्षांश – 75डिग्री .50′ पूर्वी

इस वेबसाईट को हम अपने शहर का आईना बनाना चाहते है| चाहते है, जो लोग जिंदगी की जद्दो-जेहद में अपने शहर से दूर हो गए है , वो इसको मिटटी का सौंधापन महसूस कर सके, उनके जेहन में अपने शहर की याद हमेशा बनी रहे और इस छोटे से शहर की धडकन उन तक लगातार पहुचती रहे |

ये शहर चाहता तो बहुत है की समय के साथ दौड लगा सके, पर एक अजीब सी सुस्ती तारी रहती है .. शायद .. हवा पानी ही ऐसा है इस शहर का .. कई बार लगता है की बाबा महाकाल तो चढाई जाने वाली भांग का नशा पूरे शहर पर ही चढ़ा रहता है |

खैर, आप जहाँ भी हो, अपने शहर से जुड़े रहें यही कामना है, बताईयेगा और क्या क्या चाहते है आप अपनी वेबसाइट पर, हम कोशिश करेंगे वो सब आप तक पहुँचा पाए, जल्द से जल्द ….

…तब तक भिया लोगो को राम राम!!