ताज़ा चिठ्ठे

ताज़ा चिठ्ठेमुखपृष्ठविशेषसाहित्य

भर्तृहरि : डाॅ.मुरलीधर चाँदनीवाला

भर्तृहरि —— भर्तृहरि लौट-लौट आते हैं अवन्ती में, खड़े होते हैं कल्पलता के नीचे कभी मौन,कभी मुखर। वैराग्य के जंगल में महाकाल-वन नहीं होता, शिप्रा …

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जैव विविधताताज़ा चिठ्ठेमुखपृष्ठविशेष

उज्जैन : जैव विविधता : नौलखी इको टूरिज्म पार्क

उज्जैन की जैव विविधता को दर्शाता  वन विभाग, उज्जैन का एक अद्भुत प्रयास वन विभाग , उज्जैन द्वारा १० वर्षों के अथक प्रयासों से विकसित …

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ताज़ा चिठ्ठेमंदिरमुखपृष्ठविशेष

एक अनोखा कलाकार : राजेश नागर

आपने बहुत से कलाकार देखे होंगे, आईये आज हनुमान अष्टमी के अवसर पर आपको मिलवाते है एक अनोखे कलाकार से जो ‘चोला’ श्रृंगार करते है …

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जैव विविधताताज़ा चिठ्ठेमुखपृष्ठविशेष

उज्जैन के प्रवासी पक्षी

Bar Headed Geese & Rudy Shelduck (Flying) – Across Himalaya All the way to Ujjain.   ‘मेघदूत’ में महाकवि कालिदास ने उज्जयिनी का सुंदर वर्णन …

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ताज़ा चिठ्ठेमुखपृष्ठसाहित्य

हे उज्जयिनी! तू बुला ले अपने पास।

  डाॅ.मुरलीधर चाँदनीवाला   बरसों से भटक रहा हूँ इधर-उधर जीवन बहती नदी की तरह निकल गया बहुत आगे, अब बैठता हूँ अकेले में तब याद …

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ताज़ा चिठ्ठेमुखपृष्ठशहर की हस्तियाँसंस्कृत कवितायेँ

उज्जयिनी जयते : आचार्य श्रीनिवास रथ

— महाकालपूजास्वरललिता कालिदासकविताकोमलता भुवनमलंकुरुते। उज्जयिनी जयते।। — सान्दीपनिसन्दीपितसंस्कृति-शिक्षापरम्परा प्रतिपलमञ्जुलदीपशिखोज्ज्वलमंगलनाथधरा। देवलोकरुचिरा गगनतले ललिते उज्जयिनी जयते।। — उदयनवीणावादनपुलकितवदना संकुचिता वासवदत्ता चकिताऽऽकुलिता सुप्तेवालिखिता। प्रणयरसाकुलिता मनसा मन्त्रयते। उज्जयिनी जयते।। …

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स्वागत है आपका, ये है आपके शहर की वेबसाइट उज्जैन.कॉम

समुद्र तल से ऊंचाई – 1678 फीट || देशांश – 23डिग्री.50′ उत्तर || अक्षांश – 75डिग्री .50′ पूर्वी

इस वेबसाईट को हम अपने शहर का आईना बनाना चाहते है| चाहते है, जो लोग जिंदगी की जद्दो-जेहद में अपने शहर से दूर हो गए है , वो इसको मिटटी का सौंधापन महसूस कर सके, उनके जेहन में अपने शहर की याद हमेशा बनी रहे और इस छोटे से शहर की धडकन उन तक लगातार पहुचती रहे |

ये शहर चाहता तो बहुत है की समय के साथ दौड लगा सके, पर एक अजीब सी सुस्ती तारी रहती है .. शायद .. हवा पानी ही ऐसा है इस शहर का .. कई बार लगता है की बाबा महाकाल तो चढाई जाने वाली भांग का नशा पूरे शहर पर ही चढ़ा रहता है |

खैर, आप जहाँ भी हो, अपने शहर से जुड़े रहें यही कामना है, बताईयेगा और क्या क्या चाहते है आप अपनी वेबसाइट पर, हम कोशिश करेंगे वो सब आप तक पहुँचा पाए, जल्द से जल्द ….

…तब तक भिया लोगो को राम राम!!